Friday, 8 January 2016


बहता हुआ !!

कितनी बंजर है मेरी ज़मीन
फीका पडा है आसमान
भीगी पलकों से देखती हू
लगता है सब बहता हुआ

सोच की चादर को ओढ़ के
करती हू जब जब दुआ
कुछ ऐसा उलज जाती हू
जो फिर ना कभी सवर सका
















धीरे से चलने की कोशिश मे
रखती हू कदम नया
डगमगा जाता है!! मेरे भीतर का दायरा !!

फिर कभी जब बाहो के
घेरे मै बनाया करती हू
गुमसुम मधम मधम
ख्यालो मे कहती  हू
कितना रिक्त है लम्हा
हम दोनों के दरमियाँ !!


                                                                                                                     शिल्पा अमरया 

Tuesday, 18 August 2015

जो तुम आते हो !!


मेरी सोच में जो तुम रहते हो
मुझसे जब जब कहते हो
मेरे दिल में तुम रहती हो
मेरी सासो मे महकती हो
बन के ज्योति मेरी आँखों की
मेरे जीवन में चमक भर्ती हो


मेरे मन में जो तुम बस्ते हो
हर बात समझ जाते हो
बिन बोले मेरे शब्दों को
स्याही बन कलम की !! नगीना सा उभरते हो
















मेरे ख्वाबो में जो तुम आते हो
मै जो सुनना चाहती हू !! वो कह जाते हो !
बन कर शहज़ादा  मेरा
मुझसे प्यार जताते हो !!
मुझको अपना बोल कर
बावरा कर जाते हो !


मेरी यादो में जो तुम आते हो!!
मुझे कितना सताते हो
न कहते हो कुछ जी भर!!
पर बेरुखी दिखाते  हो
मुँह फेर कर मुझसे
मीलो दूर नज़र आते हो !!



Tuesday, 21 April 2015

कभी कभी 

कभी कभी दिल में' मेरे, एक ख्याल आता है !
क्या तू ही है जो छुप के मेरी धुन गुनगुनाता है
अब से पहले बेरंग सी थी मेरी ज़िन्दगी
क्या तू ही है जो चमकीले रंग उडाता है !!

कभी कभी दिल में मेरे , एक ख्याल आता है!
ज़हन में थे तो हज़ारो अलफ़ाज़
क्या तू  ही है  जो कविता बन, कागज़ पे छाता है
मेरे ख्वाबो की दुनिया मै शब्दों की वाणी दे जाता है

कभी कभी दिल में मेरे, एक ख्याल आता है !
अब तक सपनो में रहता था तू कही !!
क्या तू ही है जो हर रोम महकता है
मेरी साँसों को , धड़कन को
एक मुस्कान से धड़कता है
















कभी कभी दिल में मेरे, एक ख्याल आता है !
अब तक आसमान में थे सितारे अनेक
क्या तू ही है। .... जो मेरा चाँद बन जाता है!
चमकते तारो की भीड़ मै भी।
अलग जगमगाता है !!

कभी कभी मेरे दिल में ,
एक ख्याल आता है
क्या तू है जो फूलो की बरसात लता है
सूखे सारे उपवन में
महक भर जाता है!!
फूलो की पगडण्डी में भंवरा बन फहराता है

कभी कभी मेरे दिल में
एक ख्याल आता है क्या तू ही है
जो मेरे ख्वाबो में आता है
मेरे ख्वाबो में आता है !!


शिल्पा अमरया 

Monday, 1 December 2014

एक भ्रम 
कुछ पाना चाहते है हम 
कुछ खोके भी ना है ग़म 
कुछ पाके भी है कम कम!! 
ये है जीवन 
तेरे मेरे आस्तित्व का दर्पण .

कुछ अपना है ! कुछ सपना है !!
कुछ सपना मेरा अपना है !
कुछ सपने छूने की  चाह में 
बिछड़ गया वो बचपन 
ये है जीवन! 
तेरे मेरे बचपन का परचम !!













कुछ ख़ुशी छुपी है मुझमे कही !
कही  छुपी है  मेरी  चुप्पी!! 
किसी  की चुपके से देख हँसी !! हो जाता है मन पावन!!
ये है जीवन !
तेरी मेरी खुशियो का यौवन 

कोई  साथ है मेरे जीवन मरण!
कोई साथ है बस एक षड 
कोई भीड़ के कोनो में भी !! बस देते है खालीपन 
ये है जीवन !
तेरे मेरे साथ का एक भरम!!


ये है जीवन 
तेरे मेरे आस्तित्व का दर्पण 
तेरे मेरे बचपन का परचम 
तेरी मेरी खुशियो का योवन 
तेरे मेरे साथ का बस "एक भ्रम "
बस एक भ्रम !!
 शिल्पा अमरया 


Monday, 11 August 2014


मातृ भूमी को नमन 

करती हू मै नमन  उन्हें 
जो मात्र भूमी पे मर मिटे 
अपनी माँ से कोसौ दूर 
माँ भगवती की गोद मे पल रहे! 
हो जाती है आँखे नम 
देख सरहद की चोटियाँ 
जिनकी बुनियाद हो कर बुलंद 
सुनाती है वीर कहानियाँ !१!

हर वो वीर जो सीमा पे 
पल पल सोचा करता होगा 
मेरी बूढ़ी माँ का 
ख्याल कौन रखता होगा !
बूढ़े पिताजी की आँखे भी, 
मानो पथरा सी जाती होंगी !!
अपने वीर बेटे को सोच 
सहर ज़हन मे आती होगी!
मेरी प्यारी बहन भी 
राखी लेके बैठी होगी 
कलाई पे राखी सजा 
भाव विभोर वो भी होगी ! 
और जिससे कोई रिश्ता ना जुड़ा 
उसका क्या मै बतलाऊ, 
मेरे न होने पर हर रोज़ आसू  बहाती होगी,
हर दुआ उसकी आगाज़ मुझ से ही करती होगी!
अपने सपनो में पंख लगा 
दिन रात ऊँचा उड़ती होगी ! 
हर पल मेरे आने की फ़रियाद खुदा से करती होगी !!

हू तैनात मे सरहद पे 
हर पल सोचा करता हू 
अपनी जन्म भूमी पे जीवन न्योछावर करता हू!
हर एक एहसास जीवन, मिला इसके ही कारण  
इसकी लाज की रक्षा मे 
जीता और मे मरता हू !!
करके हर बूँद लहू की अर्पण … चरणों  मे !!
जी जाऊँगा !!
शहादत हुई तो भी क्या 
गौरवंगत का सहरा सजाऊँगा !!

शिल्पा अमरया 

Monday, 3 March 2014

बौछार …… तेरे  रंगो की !!


धीमी सी दस्तक हुइ !
एक अजनबी की आहट थी 
घबराई !! दिल ने एक नई  शुरूवात की 
धीमे धीमे होले से 
नज़दीकियाँ बढ़ने लगी 
मेरी नन्ही सोच मे 
चाहत अनेक पलने लगी! 
एक सुनहरी मुस्कान की भी 
कीमत थी तेरी ख़ुशी 
मेरी दिल की , जान की 
एक ड़ोर तुजसे जा बंधी!!













मेरी अब परछाई मे भी 
छाने लगी कोई कमी..... 
मेरी सोच के! मुस्कान के पीछे भी था बस तू ही!
जो तेरे आने से ज़िंदगी 
लाई है रंगो की होली! 
ना जाने कैसे भीग गई मै पूरी की पूरी।  
शिल्पा अमरया 


Monday, 25 November 2013

                               वारी जावा 

        
            है पास पास कुछ इतना ख़ास
            हर सुबह छुपाती रातो के राज़ 
            वो डूबी शाम 
            सब तेरे नाम 
            वो महका महका पवन का अंजाम 
                 
                    वो भीनी सी है खुशबू तेरी
                    मदहोशी भरी तेरी हँसी       
                    तू साया है अत्तीत का 
                    तू उड़ता धुआ मनमीत का 

                      तू वन भी है कुछ घना घना
                      उपवन भी है रंगो भरा 
                      तू है दिन उत्साह का 
                      और ढलती शाम कुछ दबा दबा
                      तू शृष्टि है सिमटी हुई 
                      तू सैलाब मन में उठता कही  

                      तू रूह को पहचान मिली
                      अब मुस्कान छुपाती राज़ कही  
                      तू शक्ति है जीवित कही 
                      तू भक्ति है इस प्रीत की
                      हर रीत की  
                      मनमीत की 
                      तू भक्ति है इस प्रीत की